* आदमी जब उदास होता है, सत्य के आसपास होता है।
* होकर मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये
जिन्दगी और है सूरज से निकलते रहिए।
* अकेलापन नहीं खलता उदासी भाग जाती है
कभी खामोशियों में जब तुम्हारी याद आती है।
* अभी अरुज है तेरा मगर ख़याल रहे
कि जोर तेरा भी ऐ आफ़ताब टूटेगा।
* या रब ये भेद क्या है कि राहत की फ़िक्र ने
इनसाँ को और गम में गिरफ्तार कर दिया।
* कल सागर की लहरों को देखा
तो तेरी मस्ती का ख़याल आया।
* थे सहारे और भी दुनिया में जीने के लिए
जाने क्यों तेरे ही दामन का ख़याल आता रहा।
* जिसके ख्याल में हूँ गम उसको भी कुछ खयाल है ?
मेरे लिए यही सवाल सबसे बड़ा सवाल है।
* हजारों उड़ते हैं इस दर से जिन्दगी लेकर
ये कैसे कह दूँ के तुमको मेरा ख़याल नहीं।
* यहाँ हर एक को चाहत है धन की
है किसको फ़िक्र अब अपने वतन की।
* किस-किस की फ़िक्र कीजिए किस-किस को रोइए
आराम बड़ी चीज है मुँह ढक के सोइए।
* इतना रहे ख़याल सताने के साथ-साथ
हम भी बदल रहे हैं ज़माने के साथ-साथ।
* अजब ये जिन्दगी की कैद है, दुनिया का हर इन्साँ,
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है।
* मैं खुद भी एहतियातन इस गली से कम गुजरता हूँ
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए।
* उनकी गली में जिस दम पहुँचा मेरा जनाजा
हसरत से देखते थे पर्दा उठा-उठा के।
* उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए।
* जितना मायूस है वो शख्स बिछड़कर मुझसे
इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था।
* हर गली, हर कूचे पर मेरी मजार है
जहाँ हुस्न देखा वहीं मर गए।
* न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरजू थी उनसे मुलाकात की।
* जो तमन्ना दिल में थी वो दिल में घुटकर रह गई
उसने पूछा भी नहीं हमने बताया भी नहीं।
* अब उनको देखने की तमन्ना ही मर गई
देखे हुए किसी को जमाना गुजर गया।
* उम्रे-दराज माँग के लाए थे चार दिन
दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
* इक बार दिल ने की थी तेरी आरजू की भूल
जालिम मुसीबतों में गिरफ़्तार हो गया।
* हसरत पे उस मुसाफ़िरे बेकस की रोइए
जो थक के बैठ जाता हो मंजिल के सामने।
* बातों - बातों में कोई बात खटक जाती है
एक - दो लफ़्ज ही बेगाना बना देते हैं।
* साफ जाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं
मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं।
* अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कुराहट का
कभी गिराया है मुझको कभी संभाला है।
* चुप हैं किसी सबब से तो पत्थर हमें न जान
दिल पे असर हुआ है तेरी बात - बात का।
* हरेक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है
तुम्हीं कहो के ये अन्दाज़े गुफ्तगू क्या है।
* हम नहीं तीर और तलवार से मरने वाले
क़त्ल करना है तो एक तिरछी नज़र काफी है।
* खंजर से करो बात न तलवार से पूछो
मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो।
* जख़्म तलवार के गहरे भी हों मिट जाते हैं
लफ़्ज तो दिल में उतर जाते हैं खंजर की तरह।
* क़त्ल करके क़ातिल ने बहुत हाथ मले
उसने जब मेरे तड़पने का सलीका देखा।
* मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजार में ख़ामोशी पहचाने कौन।
* तुमने चुप रहके सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले।
* मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मख़सूस होते हैं
ये वो नग़मा है जो हर साज पे गाया नहीं जाता।
* जिन्दगी का साज भी क्या साज है
बज रहा और बेआवाज है ।
* मोहब्बत सोज भी है साज भी है
ये ख़ामोशी भी है आवाज भी है ।
* लो अब मैं रुख़सत होता हूँ सम्हालो साजे गजल
छेड़ो नए तराने कि मेरे नग़्मों को नींद आती है।
* दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो ।
* कहते हो तुम दिल का भरोसा नहीं है
महफ़िल में मचल जाए ऐसा तो नहीं है ।
* जो तेरी बज़्म से उठा वो इस तरह उठा
किसी की आँख में आँसू किसी के दामन में ।
* उदास - उदास है चेहरा निग़ाह बरहम है
ये जिन्दगी है कि ये जिन्दगी का मातम है ।
* हुस्न वालों की मासूम जफ़ाएँ देखो
क़त्ल करके भी वो क़ातिल नहीं होते।
* मंजर भी हादसे का अजीबो गरीब था
वो आग से जला जो नदी के करीब था।
* तेरे पाँव के नीचे कोई जमीन नहीं
कमाल ये है के फिर भी तुझे यकीन नहीं।
* अपनी बुलंदियों पर मत नाज़ करो इतना
हमने तो सितारों को भी गिरते हुए देखा है।
* होकर मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिये
जिन्दगी और है सूरज से निकलते रहिए।
* अकेलापन नहीं खलता उदासी भाग जाती है
कभी खामोशियों में जब तुम्हारी याद आती है।
* अभी अरुज है तेरा मगर ख़याल रहे
कि जोर तेरा भी ऐ आफ़ताब टूटेगा।
* या रब ये भेद क्या है कि राहत की फ़िक्र ने
इनसाँ को और गम में गिरफ्तार कर दिया।
* कल सागर की लहरों को देखा
तो तेरी मस्ती का ख़याल आया।
* थे सहारे और भी दुनिया में जीने के लिए
जाने क्यों तेरे ही दामन का ख़याल आता रहा।
* जिसके ख्याल में हूँ गम उसको भी कुछ खयाल है ?
मेरे लिए यही सवाल सबसे बड़ा सवाल है।
* हजारों उड़ते हैं इस दर से जिन्दगी लेकर
ये कैसे कह दूँ के तुमको मेरा ख़याल नहीं।
* यहाँ हर एक को चाहत है धन की
है किसको फ़िक्र अब अपने वतन की।
* किस-किस की फ़िक्र कीजिए किस-किस को रोइए
आराम बड़ी चीज है मुँह ढक के सोइए।
* इतना रहे ख़याल सताने के साथ-साथ
हम भी बदल रहे हैं ज़माने के साथ-साथ।
* अजब ये जिन्दगी की कैद है, दुनिया का हर इन्साँ,
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है।
* मैं खुद भी एहतियातन इस गली से कम गुजरता हूँ
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए।
* उनकी गली में जिस दम पहुँचा मेरा जनाजा
हसरत से देखते थे पर्दा उठा-उठा के।
* उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए।
* जितना मायूस है वो शख्स बिछड़कर मुझसे
इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी न था।
* हर गली, हर कूचे पर मेरी मजार है
जहाँ हुस्न देखा वहीं मर गए।
* न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरजू थी उनसे मुलाकात की।
* जो तमन्ना दिल में थी वो दिल में घुटकर रह गई
उसने पूछा भी नहीं हमने बताया भी नहीं।
* अब उनको देखने की तमन्ना ही मर गई
देखे हुए किसी को जमाना गुजर गया।
* उम्रे-दराज माँग के लाए थे चार दिन
दो आरजू में कट गए दो इंतजार में।
* इक बार दिल ने की थी तेरी आरजू की भूल
जालिम मुसीबतों में गिरफ़्तार हो गया।
* हसरत पे उस मुसाफ़िरे बेकस की रोइए
जो थक के बैठ जाता हो मंजिल के सामने।
* बातों - बातों में कोई बात खटक जाती है
एक - दो लफ़्ज ही बेगाना बना देते हैं।
* साफ जाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं
मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं।
* अजीब लहजा है दुश्मन की मुस्कुराहट का
कभी गिराया है मुझको कभी संभाला है।
* चुप हैं किसी सबब से तो पत्थर हमें न जान
दिल पे असर हुआ है तेरी बात - बात का।
* हरेक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है
तुम्हीं कहो के ये अन्दाज़े गुफ्तगू क्या है।
* हम नहीं तीर और तलवार से मरने वाले
क़त्ल करना है तो एक तिरछी नज़र काफी है।
* खंजर से करो बात न तलवार से पूछो
मैं क़त्ल हुआ कैसे मेरे यार से पूछो।
* जख़्म तलवार के गहरे भी हों मिट जाते हैं
लफ़्ज तो दिल में उतर जाते हैं खंजर की तरह।
* क़त्ल करके क़ातिल ने बहुत हाथ मले
उसने जब मेरे तड़पने का सलीका देखा।
* मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन
आवाजों के बाजार में ख़ामोशी पहचाने कौन।
* तुमने चुप रहके सितम और भी ढाया मुझ पर
तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले।
* मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मख़सूस होते हैं
ये वो नग़मा है जो हर साज पे गाया नहीं जाता।
* जिन्दगी का साज भी क्या साज है
बज रहा और बेआवाज है ।
* मोहब्बत सोज भी है साज भी है
ये ख़ामोशी भी है आवाज भी है ।
* लो अब मैं रुख़सत होता हूँ सम्हालो साजे गजल
छेड़ो नए तराने कि मेरे नग़्मों को नींद आती है।
* दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब
क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो ।
* कहते हो तुम दिल का भरोसा नहीं है
महफ़िल में मचल जाए ऐसा तो नहीं है ।
* जो तेरी बज़्म से उठा वो इस तरह उठा
किसी की आँख में आँसू किसी के दामन में ।
* उदास - उदास है चेहरा निग़ाह बरहम है
ये जिन्दगी है कि ये जिन्दगी का मातम है ।
* हुस्न वालों की मासूम जफ़ाएँ देखो
क़त्ल करके भी वो क़ातिल नहीं होते।
* मंजर भी हादसे का अजीबो गरीब था
वो आग से जला जो नदी के करीब था।
* तेरे पाँव के नीचे कोई जमीन नहीं
कमाल ये है के फिर भी तुझे यकीन नहीं।
* अपनी बुलंदियों पर मत नाज़ करो इतना
हमने तो सितारों को भी गिरते हुए देखा है।
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