🌷लोकतंत्र को खतरा अब चौथे स्तंभ से भी🌷
आज कलम का कागज से मै दंगा करने वाला हुँ
मीडिया की सच्चाई को मै नंगा करने वाला हुँ ।
मीडिया जिसको लोकतंत्र का चौंथा खंभा होना था
खबरों की पावनता में जिसको पावन गंगा होना था।
आज वही दिखता है हमको वैश्या के किरदारों में
बिकने को तैयार खड़ा है गली चौक नंगी बाजारों में।
दाल में काला होता है तुम पुरी काली दाल दिखाते हो,,
सुरा सुंदरी उपहारों की तुमसब खुब मलाई खाते हो।
गले मिले सलमान से आमिर ये खबरों का स्तर है,
और दिखाते इंद्राणी का कितने फिट का बिस्तर है।
म्यॉमार में सेना के साहस का खंडन करते हो,
और हमेशा दाउद का तुम महिमा मंडन करते हो।
हिन्दु कोई मर जाए तो घर का मसला कहते हो,
मुसलमान की मौत को मानवता पे हमला कहते हो।
लोकतंत्र की संप्रभुता पर तुमने मारा चाटा है,,
सबसे ज्यादा तुमने हिन्दु मुसलमान को बॉंटा है।
साठ साल की लूट पे भारी एक सुट दिखलाते हो,
ओवैशी को भारत का तुम रॉबिनहुड दिखलाते हो।
दिल्ली में जब पापी वहशी चीरहरण में लगे रहे,
तुम ऐश्वर्या की बेटी के नामकरण में लगे रहे ।
ये दुनिया अब,सब समझ रही है खेल ये बेहद गंदा है,
मीडिया हाउस और नही कुछ ब्लैकमेलिंग का धंधा है।
गुंगे की आवाज बनो तुमसब अंधे की लाठी हो जाओ
सत्य लिखो निष्पक्ष लिखो और फिर से तुम जिंदा हो जाओ.....
फिर से जिंदा........
🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
🌷🌷🌷🌷🌷
दिल्ली दानव सी लगती है, जन्नत लगे कराची है,
जिनकी कलम तवायफ़ बनकर दरबारों में नाची है...!!! .
डेढ़ साल में जिनको लगने लगा देश दंगाई है, पहली बार देश के अंदर नफरत सी दिखलायी है...!!! .
पहली बार दिखी हैं लाशें पहली बार बवाल हुए, पहली बार मरा है मोमिन पहली बार सवाल हुए...!!!
नेहरू से नरसिम्हा तक भारत में शांति अनूठी थी,
पहली बार खुली हैं आँखे, अब तक शायद फूटी थीं...!!!
एक नयनतारा है जिसके नैना आज उदास हुए, जिसके मामा लाल जवाहर, जिसके रुतबे ख़ास हुए...!!!
पच्चासी में पुरस्कार मिलते ही अम्बर में झूल गयी,
रकम दबा सरकारी, चौरासी के दंगे भूल गयी...!!!
भुल्लर बड़े भुलक्कड़ निकले, व्यस्त रहे रंगरलियों में,
मरते कश्मीरी पंडित नज़र न आये काश्मीर की गलियों में...!!!
अब अशोक जी शोक करे हैं, बिसहाडा के पंगो पर,
आँखे इनकी नही खुली थी भागलपुर के दंगो पर...!!!
आज दादरी की घटना पर सब के सब ही रोये हैं,
जली गोधरा ट्रेन मगर तब चादर ताने सोये हैं...!!!
छाती सारे पीट रहे हैं अखलाकों की चोटों पर, कायर बनकर मौन रहे जो दाऊद के विस्फोटों पर...!!!
ना तो कवि, ना कथाकार, ना कोई शायर लगते हैं,
मुझको ये आनंद भवन के नौकर चाकर लगते हैं...!!! .
दिनकर, प्रेमचंद, भूषण की जो चरणों की धूल नहीं,
इनको कह दूं कलमकार, कर सकता ऐसी भूल नहीं...!!!
चाटुकार, मौका परस्त हैं, कलम गहे खलनायक हैं,
सरस्वती के पुत्र नही हैं, साहित्यिक नालायक हैं...!!!!!!!
🌷🌷🌷🌷🌷
गजनी का है तुम में खून भरा जो तुम अफजल के गुण गाते हो,
जिस देश में तुमने जन्म लिया उसको दुश्मन बतलाते हो !
भाषा की कैसी आजादी जो तुम भारत माँ का अपमान करो,
अभिव्यक्ति का ये कैसा रूप जो तुम देश की इज्जत नीलाम करो !
अफजल को अगर शहीद कहते हो तो हनुमनथप्पा क्या कहलाएगा,
कोई इनके रहनुमाओं का मजहब मुझको बतलाएगा।
अपनी माँ से जंग करके ये कैसी सत्ता पाओगे,
जिस देश के तुम गुण गाते हो, वहाँ बस काफिर कहलाओगे
हम तो अफजल को मारेंगे तुम अफजल फिर से पैदा कर लेना,
तुम जैसे नपुंसकों पे भारी पड़ेगी ये भारत की सेना ।
तुम ललकारो और हम न आएं ऐसे बुरे हालात नहीं
भारत को बर्बाद करो इतनी भी तुम्हारी औकात नहीं।
कलम पकड़ने वाले हाथों को बंदूक उठाना न पड़ जाए,
अफजल के लिए लड़ने वाले कहीं हमारे हाथों न मर जाएं,
भगतसिंह और आजाद की इस देश में कमी नहीं,
बस एक इंकलाब होना चाहिए,
इस देश को बर्बाद करने वाली हर आवाज दबनी चाहिए,
ये देश तुम्हारा है, ये देश हमारा है, हम सब इसका सम्मान करें,
जिस मिट्टी पे जनम लिया उसपे हम अभिमान करें, जय हिन्द !
🌷एक सैनिक की गाथा 🌷
जब युद्ध में वीरगति प्राप्त करता है तो अपने साथी से क्या
कहता है एक सैनिक .......
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरी माता पूछे तो, जलता दीप बुझा देना!
इतने पर भी न समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना!!
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना!
इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ दिखा देना !!
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना!
इतने पर भी न समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना!!
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरे पिता पूछे तो, हाथों को सहला देना!
इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!!
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका तुम सहला देना!
इतने पर भी ना समझे तो, सीने से उसको लगा लेना!!
साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना;
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना!
इतने पर भी ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!
पठानकोट में शहीद हमारे देश के वीर जवानों को समर्पित
देश के वीर लालो को मेरा शत शत नमन 🙏 🙏 🙏
जय हिन्द जय भारत .......
🌷🌷🌷🌷🌷
No comments:
Post a Comment